राजनीति को स्वच्छ करना जरूरी है -प्रकाश सिन्हा ~ Viral Fact Now

Wednesday, August 22, 2018

राजनीति को स्वच्छ करना जरूरी है -प्रकाश सिन्हा

सरकार हमें जो दिखाती है, हम वही देखते हैं। अपना विवेक खो चुके हैं। भक्ति देश की होनी चाहिए, पर भक्ति सरकार की होती है। सरकार तो आनी-जानी है, पर देश आनी-जानी नहीं है। यह ध्यान रहे।

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जब लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे, तब विपक्ष कहता था कि बिहार में जंगलराज है। जब नीतीश कुमार ने लालू यादव और राहुल गांधी से गठबंधन कर सरकार बनायी तो कहा गया कि नीतीश ने जंगलराज वालों से मिलकर सरकार बनायी है और अब जब नीतीश ने पलटी मारकर भाजपा के समर्थन से सरकार बनायी, तब भी बिहार की जनता सुरक्षित नहीं है और वहां जंगलराज कायम है। दरअसल, बिहार ही नहीं, पूरे हिन्दुस्तान के राज्यों की स्थिति यही है। सारा प्रशासन तंत्र और पुलिस सिर्फ राजधानी में चुस्त रहती है। हालांकि राजधानी में भी क्राइम कम नहीं होते। पर छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में कानून-व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब है। 

बिहार, यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली कोई भी जगह ऐसी नहीं है, जहां अपराध नहीं हो रहे हैं। महिला उत्पीड़न, बाल उत्पीड़न, वृद्ध उत्पीड़न क्या बचा हुआ है? चोरी, डकैती, हत्या, बलवे, रेप और अब ये पिछले 4 सालों से मॉब लिंचिंग क्या नहीं हो रहा है? मैं यह नहीं कह रहा कि ये सब नरेन्द्र मोदी के ही राज में हो रहे हैं। अपराध तो पहले से ही होते आ रहे हैं। महिला पूर्ववर्ती सरकारों में भी अपमानित हो रही थी। मैं हर घटना का बयान यहां पर नहीं कर सकता। ये जरूर है कि मॉब लिंचिंग मोदी के राज में ही शुरू हुए। बलात्कारों को लेकर जैसे अपमानजनक बयान दिये जाते रहे, मॉब लिंचिंग के आरोपियों को सम्मानित किया जाता रहा, वैसे में क्या अपराध रुक पायेंगे? मेरे पास इतना डेटा, शर्मनाक बयानबाजी, गलीज घटनाएं हैं कि एक पूरी किताब बन जाये। अपराधी जब संसद में आ जाये, तब अपराध कैसे रुके? 


सभी दलों में अपराधी तत्व हैं, कम्युनिस्ट पार्टी को छोड़कर। अखबार जनता को चुनाव के पूर्व ही बता देते हैं कि किसका क्या रेकॉर्ड है, इसके बावजूद आप अपराधियों को ही वोट देते हैं तो अपराध कैसे रुके? आक्रोशित होने का कोई लाभ नहीं है। तह तक पहुंचना होगा। भाजपा से लेकर हर पार्टी अपराधियों को प्रश्रय देती है। और अब तो हद हो रही है। 


राजनीति को स्वच्छ करना जरूरी है। शौचालयों, नैपकिन, सफाई आदि में जनता को काफी भरमाया गया है। इन बातों की आड़ में मूल बातों से ध्यान हटाया गया है। पर भक्ति है कि टूटती नहीं। आंखों पर पड़ा पर्दा हटता नहीं। सरकार हमें जो दिखाती है, हम वही देखते हैं। अपना विवेक खो चुके हैं। भक्ति देश की होनी चाहिए, पर भक्ति सरकार की होती है। सरकार तो आनी-जानी है, पर देश आनी-जानी नहीं है। यह ध्यान रहे।

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