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Thursday, February 14, 2019

उदास जेबें और पहला इश्क - अमित ब्रिज

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pehla ishq - hindi story
ये उन दिनों की बात है जब कोसों दूर 'इस्कूल' के फासले क़दमों से तय हुआ करते थे। पगडंडी से लगे खेतों में पसरी गेहूं की बालियों को सहलाते, मटर चुराकर खाते, गलियों में उछलकूद करते कब इस्कूल आ जाता, पता ही नहीं चलता। इस्कूल की गेट पर एक ताऊ लठ्ठा (गुड़दानी) बेचा करते थे। मै हर रोज वहां खड़ा हो जाता। उसकी खुशबु को अपनी सांसों में उतारकर खुद को तृप्त करने की कोशिश करता। जब जेबें उदास हैं तो आत्मतृप्ति का ये हुनर खुद बा खुद आ जाता है। 
फरवरी के दूसरे सप्ताह का अंतिम दिन था और हमारे सत्र का भी। अगले दिन लंबी छुट्टी होने वाली थी और उसके बाद परीक्षा। उन दिनों दसवीं की तरह आठवीं का भी सेंटर जाया करता था। उस पर सितम ये कि लड़कियों को अलग इस्कूल में भेजा जाता और लड़कों को अलग। हॉल टिकट लेने के लिए पूरे इस्कूल में अफरा तफरी मची थी और मैं आत्मतृप्ति में लगा था। तुम अचानक तेजी से आई और जोर का धक्का दिया था मुझे। मुंह के बल गिरा था मैं और तुम खिलखिलाकर हंस पड़ी थी। सॉरी कहने का यही कस्बाई सलीका था उन दिनों। अंग्रेजीयत की आमद हमारी सरहद में अभी नहीं हो पाई थी। 25- 25 पैसे में लठ्ठे का दो पैकेट लिया उस दिन तुमने और एक पैकेट मुझे थमा दिया। ओ तुम्हारी दरियादिली थी या सहज प्रेम की पहली अभिव्यकि्त , मैं आज तक नहीं जान सका। महीनों बाद 25 पैसे जुटा पाया। सोचा अगले सत्र में तुम्हें दे दूंगा। अगला सत्र आया मगर तुम नहीं आई। दिन महीने में बदले और महीने साल में तब्दील हो गए। 


आज फिर फरवरी के दूसरे सप्ताह का अंतिम दिन है। सुरज की कदमताल के साथ फिजा में घुलती जा रही है तुम्हारे ख्यालों की गुलाबी खुश्बू. अच्छा सुनो, वो आम का पेड़ याद है तुम्हे जिसकी छांव में मास्साब क्लास लिया करते थे. उथर जाना हुआ तो उसकी जड़ों को खोदना. वहीं छुपा रखी है मैंने तुम्हारे मुकद्दस मोहब्बत के पहले अभिव्यकि्त की आखिरी निशानी...तुम्हारा २५ पैसा...बामुश्किल इकट्ठा किया था...जेबें उसका भार उठाने में नाकाम हो गई थी और भारी जेबों से अय्याशियां की जाती है, मोहब्बत नहीं...

Wednesday, August 22, 2018

राजनीति को स्वच्छ करना जरूरी है -प्रकाश सिन्हा

सरकार हमें जो दिखाती है, हम वही देखते हैं। अपना विवेक खो चुके हैं। भक्ति देश की होनी चाहिए, पर भक्ति सरकार की होती है। सरकार तो आनी-जानी है, पर देश आनी-जानी नहीं है। यह ध्यान रहे।

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जब लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे, तब विपक्ष कहता था कि बिहार में जंगलराज है। जब नीतीश कुमार ने लालू यादव और राहुल गांधी से गठबंधन कर सरकार बनायी तो कहा गया कि नीतीश ने जंगलराज वालों से मिलकर सरकार बनायी है और अब जब नीतीश ने पलटी मारकर भाजपा के समर्थन से सरकार बनायी, तब भी बिहार की जनता सुरक्षित नहीं है और वहां जंगलराज कायम है। दरअसल, बिहार ही नहीं, पूरे हिन्दुस्तान के राज्यों की स्थिति यही है। सारा प्रशासन तंत्र और पुलिस सिर्फ राजधानी में चुस्त रहती है। हालांकि राजधानी में भी क्राइम कम नहीं होते। पर छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में कानून-व्यवस्था की स्थिति बहुत खराब है। 

बिहार, यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली कोई भी जगह ऐसी नहीं है, जहां अपराध नहीं हो रहे हैं। महिला उत्पीड़न, बाल उत्पीड़न, वृद्ध उत्पीड़न क्या बचा हुआ है? चोरी, डकैती, हत्या, बलवे, रेप और अब ये पिछले 4 सालों से मॉब लिंचिंग क्या नहीं हो रहा है? मैं यह नहीं कह रहा कि ये सब नरेन्द्र मोदी के ही राज में हो रहे हैं। अपराध तो पहले से ही होते आ रहे हैं। महिला पूर्ववर्ती सरकारों में भी अपमानित हो रही थी। मैं हर घटना का बयान यहां पर नहीं कर सकता। ये जरूर है कि मॉब लिंचिंग मोदी के राज में ही शुरू हुए। बलात्कारों को लेकर जैसे अपमानजनक बयान दिये जाते रहे, मॉब लिंचिंग के आरोपियों को सम्मानित किया जाता रहा, वैसे में क्या अपराध रुक पायेंगे? मेरे पास इतना डेटा, शर्मनाक बयानबाजी, गलीज घटनाएं हैं कि एक पूरी किताब बन जाये। अपराधी जब संसद में आ जाये, तब अपराध कैसे रुके? 


सभी दलों में अपराधी तत्व हैं, कम्युनिस्ट पार्टी को छोड़कर। अखबार जनता को चुनाव के पूर्व ही बता देते हैं कि किसका क्या रेकॉर्ड है, इसके बावजूद आप अपराधियों को ही वोट देते हैं तो अपराध कैसे रुके? आक्रोशित होने का कोई लाभ नहीं है। तह तक पहुंचना होगा। भाजपा से लेकर हर पार्टी अपराधियों को प्रश्रय देती है। और अब तो हद हो रही है। 


राजनीति को स्वच्छ करना जरूरी है। शौचालयों, नैपकिन, सफाई आदि में जनता को काफी भरमाया गया है। इन बातों की आड़ में मूल बातों से ध्यान हटाया गया है। पर भक्ति है कि टूटती नहीं। आंखों पर पड़ा पर्दा हटता नहीं। सरकार हमें जो दिखाती है, हम वही देखते हैं। अपना विवेक खो चुके हैं। भक्ति देश की होनी चाहिए, पर भक्ति सरकार की होती है। सरकार तो आनी-जानी है, पर देश आनी-जानी नहीं है। यह ध्यान रहे।

Monday, August 13, 2018

चाइना में छप रहे भारत के नोट, चीनी मीडिया के खुलासे से घेरे में मोदी सरकार!

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2000 और 500 की नई नोटों को लेकर चीनी मीडिया ने एक बड़ा खुलासा किया है कि आपकी जेब में जो भारतीय नोट हैं उसकी छपाई चीन में हुई है? और ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि यह चीनी मीडिया का दावा है,  साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक भारतीय नोटें चीन में छापी जा रही है। 



इस रिपोर्ट के बाद सियासी गलियारे में हलचल सी मच गई है।  कांग्रेस पार्टी के लीडर शशि थरूर ने इसे बेहद सेंसेटिव बताते हुए सरकार से इस पर स्पष्ट रूप से जवाब माँगा है।  हालांकि  इस बात की कन्फर्मेशन चीन की सरकार ने नहीं की है और भारत सरकार की तरफ से भी इस पर कोई स्टेटमेंट नहीं आया है। 


गौरतलब हो कि, चीनी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह खबर आ रही है कि हाल के वर्षों में चीन को भारत के साथ साथ और भी कई बाहरी देशों के नोट छापने का काम मिल रहा है।  चाइना बैंकनोट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ल्यू गिशेंग की मानें तो हाल के वर्षों तक चीन विदेशी नोट नहीं छाप रहा था लेकिन अब यह काम शुरू कर दिया गया है। यहां यह भी स्पष्ट किया जाता है कि इस खबर की कहीं से कोई पुष्टि नहीं हुई है , साथ ही सरकार की तरफ से भी अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। 

Monday, July 16, 2018

राहुल गाँधी ने ऐसा क्या कह दिया की बॉलीवुड उन पर बरसा रहा है प्यार

राहुल गाँधी ने ऐसा क्या कह दिया की बॉलीवुड उन पर बरसा रहा है प्यार

'सेक्रेड गेम्स' पर राहुल गांधी का ट्वीट

बॉलीवुड की तरफ से राहुल गाँधी की तारीफ की जा रही है। दरअसल इस तारीफ की वजह है राहुल गाँधी के जरिये किया गया एक ट्वीट। राहुल के इस ट्वीट के बाद जहां सोशल मीडिया यूजरों ने उन्हें काफी ट्रोल किया वहीं बॉलीवुड के दिग्गजों ने उन्हें खूब सराहा। अनुराग कश्यप ने राहुल के ट्वीट को रीट्वीट कर लिखा- "ये हुई न बात (दैट्स अ येय...)"। आखिर इस ट्वीट में उन्होंने क्या कहा और उनकी इतनी तारीफ क्यों हो रही है और यह ट्वीट उन्होंने किया क्यों। ......... आइये जानते हैं ......

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नेटफ्लिक्स पर आने वाली अनुराग कश्यप की वेब सीरीज 'सेक्रेड गेम्स' इन दिनों लगातार सुर्खियों में है। पहले तो कुब्रा सैत के न्यूड सीन ने सुर्खियां बटोरी फिर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर की गयी टिप्पणी ने। हालाँकि विवादित डायलॉग बोलने के आरोपी एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत मिली है। वहीं, इस मामले पर राहुल के ट्वीट के बाद बॉलीवुड उन पर प्यार बरसा रहा है। बतादें कि कांग्रेस नेता राजीव सिंहा ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी और शो के निर्माताओं के खिलाफ केस दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि शो में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के लिए अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया है।

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी करार दिया है। राहुल गांधी ने शनिवार को ट्वीट किया था, भाजपा या आरएसएस का मानना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नियंत्रण होना चाहिए। मेरा मानना है कि यह स्वतंत्रता मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार है। मेरे पिता देश की सेवा में जिए और मर गए। उन्होंने कहा कि एक काल्पनिक प्रोग्राम उनके पिता (राजीव गांधी) की छवि को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

Sunday, June 24, 2018

UAE सरकार का फैसला, दुबई में दो दिन फ्री में रुक सकेंगे भारतीय

UAE government's decision, Indians can stay free in Dubai for two days

यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ने भारतीय टूरिस्टों को ध्यान में रखकर एक खास निर्णय लिया है। इस निर्णय के माध्यम से UAE सरकार ने भारतीय टूरिस्टों के लिए खास छूट दी है। इस निर्णय के अंतर्गत दुबई और अबुधाबी होते हुए दुनिया के मुख़्तलिफ़ जगहों का सफर करने वाले भारतीय दुबई और अबुधाबी में 48 घंटे तक रुक सकते हैं इसके लिए उन्हें एक भी पैसा खर्च नहीं करना होगा।

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बता दें कि बड़ी तादाद में भारतीय दुबई या फिर अबु धाबी से होकर दूसरे देश जाते हैं। दो दिन का फ्री ट्रांजिट वीजा मिलने का मतलब है कि यहाँ से होकर जाने वाले यात्रियों को अगर १ या २ दिन दुबई या फिर अबु धाबी में रुकना पड़े तो उन्हें इस रियायत का लाभ मिलेगा। अगर किसी भारतीय को किसी वजह से दो दिन से ज्यादा का वक़्त लग जाए और उन्हें वहां दो दिन से ज्यादा रुकना पड़े तो इस सहूलियत के लिए आप सिर्फ 50 दिरहम (तकरीबन 1000 रुपये) देकर इस टाइम लिमिट को सीधे चार दिन या 96 घंटों के लिए बढ़ा सकते हैं। यात्री इन ट्रांजिट वीजा को सभी यूएई एयरपोर्ट पर बने पासपोर्ट कंट्रोल हॉल में एक्‍सप्रेस काउंटर्स से हासिल कर सकते हैं।
इस नए नियम को यूएई सरकार कब से लागू करने वाली है, अभी इसका खुलासा नहीं हुआ है। बताते चलें कि साल में लाखों भारतीय पर्यटक अबुधाबी जाते हैं और यूएई भारतीयों की पसंद बन चुका है। यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) के अलावा अन्‍य कई देश भी भारतीय यात्रियों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं और वीजा नियमों को आसान बना रहे हैं।

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Thursday, June 21, 2018

दुनिया का विचित्र व्यवहार

निखिलरश्मि गुप्ता। इस दुनिया के व्यवहार का सत्य बहुत ही कठोर और आश्चर्यचकित करने वाला है। किसी एक व्यक्ति को इसके लिए मुजरिम नहीं ठहराकर हम कटघरे में खड़ा नहीं कर सकते। सभी लोग कमोबेश ऐसा ही आचरण करते हैं। सबसे मजे की बात तो यह है कि जानते-बूझते हुए, बिना सोचे-समझे सभी भेड़चाल चले जा रहे हैं। कोई भी अपने दिमाग पर जोर नहीं डालना चाहता। हर व्यक्ति सोचता है जो हो रहा है उसे बस होने दो, मैं किसी को टोककर या मना करके बुरा क्यों बनूँ?

दुनिया का विचित्र व्यवहार

यह दुनिया खुशी के समय आगे चलती है और दुख के वक्त पीछे हो जाती है। इसका कारण जो समझ आता है, वह है कि सुख के समय वह बताना चाहती है कि उसे अधिक प्रसन्नता है। परन्तु दुख के समय वह शायद यह साबित करना चाहती है कि हम तुम्हारे पीछे-पीछे चल रहे हैं, घबराना मत। इस कथन का बहुत अच्छा उदाहरण है कि विवाह के अवसर पर बारात में दूल्हा सबसे पीछे घोड़ी पर रहता है और बन्धु-बान्धव आगे चलते हैं। मौत के समय जब अर्थी चार कन्धों पर आगे रहती है तब लोग उसके पीछे चलते हैं। 

एक और नई रीति का प्रचलन इन दिनों बड़े जोरों पर है। वह है लोग मोमबत्ती जलाकर मुर्दों को याद करते हैं और इसके विपरीत मोमबत्ती बुझाकर अपने जन्मदिन की खुशियाँ मनाते हैं। यानी यहाँ भी उल्टा व्यवहार दिखाई देता है। खुशी के समय में प्रकाशित करने का कार्य करना चाहिए, बुझाने का कार्य करना उचित नहीं है। परन्तु ऐसा हो रहा है तो हो रहा है। सभी लोग आँख मूँदे उसी लीक पर बिना विचारे चले जा रहे हैं।

लोगों के हृदयों में दया, ममता, धर्म, ईमान, सहिष्णुता आदि मानवोचित गुण लगता है शेष बचे ही नहीं हैं। इन्सान दिन-प्रतिदिन पत्थर दिल बनते जा रहे हैं। शायद इसीलिए उन्हें अपने ही जैसे पत्थर के भगवान पसन्द आते हैं। उसी पत्थर के भगवान की वे पूजा करते हैं, घर में कलह-कलेश करते हैं। लोग धर्म का मुखौटा लगाकर दिन भर पापकर्म करते हैं। दुनिया को दिखाने के लिए भण्डारे करते हैं परन्तु भगवान के रूप में घर में बैठे हुए माता-पिता उन्हें फूटी आँख नहीं भाते, वे उन्हें बोझ के समान लगते हैं। किसी तरह उनसे छुटकारा मिल जाए बस इसी फिराक में सदा ही लगे रहते हैं। बहुत से लोग अपने माता-पिता को न ढंग से खाना खिलाते हैं और न ही उनकी जरूरतों का ध्यान रखते हैं। फिर भी वे चाहते हैं कि सभी लोग उन्हें बहुत बड़ा भक्त और दानी मानें।

उसी पत्थर के भगवान को ही वे छप्पन भोग लगते हैं। उनके सामने फुटपाथ पर दीन-हीन, असहाय लोग भूखे, प्यासे मर जाते हैं। उनकी फिक्र किसी को नहीं होती है। उनकी ओर वे पलटकर भी नहीं देखते। उन्हें पूछना या उनका दुख-दर्द बाँटने के स्थान पर उन्हें ऐसे वितृष्णा से घूरकर देखते हैं जैसे वे इन्सान नहीं कीड़े-मकोड़े हों और उनके मार्ग में जबर्दस्ती घुसपैठ करने के लिए आ गए हों। उन लोगों के अनुसार ऐसे लोगों का इस दुनिया से चले जाना ही श्रेयस्कर है।

बहुत से लोगों को देखो ऐसा तो लगता है मानो उन्होंने अपनी लाज-शर्म बेच खाई है। उनकी पानी आँखों समाप्त हो गया है। हर समर्थ व्यक्ति साम, दाम, दण्ड, भेद का सहारा लेकर दूसरों को अपने वश में करना चाहता है। एक-दूसरे पर विश्वास करने का स्वभाव कहीं पीछे छूटता जा रहा है। मित्र अपने मित्र से किनारा कर रहा है, भाई-बहिन एक-दूसरे को फूटी आँख नहीं सुहाते। जीवन देने और पालन-पोषण करने वाले माता-पिता को असहाय अवस्था में छोड़कर गुलछर्रे उड़ाने में उन नालायक बच्चों को शर्म नहीं आती। सबके स्वार्थ आड़े आ रहे हैं। 

जब भी कहीं इन विषयों पर चर्चा होती है तो सभी लोग इन दुखदायी स्थितियों से परेशान दिखाई देते हैं। इनसे बचने का उपाय भी खोजना चाहते हैं। फिर वही बात कि मैं अपने व अपने परिवारी जनों में सुधार न करूँ। इसकी शुरूआत सामने वाले के घर से हो। दूसरों का मुँह ताकने के स्थान पर अपने ही घर से यदि नव आरम्भ किया जाए तो बहुत-सी समस्याओं से शीघ्र मुक्ति मिल सकती है। अतः आज से क्यों अभी से ही परिवर्तन की मुहिम को चलाने का साझा जिम्मा हम सबको उठाना चाहिए। तभी स्वस्थ समाज की परिकल्पना करना सार्थक हो सकेगा।

Monday, June 18, 2018

प्रेम एक शुद्ध भावना है और यह कभी नियमों में नहीं बंध सकता - प्रकाश सिन्हा

प्रेम एक शुद्ध भावना है और यह कभी नियमों में नहीं बंध सकता - love is a pure feeling and it can never be tied to rules
pyar, pyaar, prem, kuch rang pyar ke, kuch rang pyar ke aise bhi, kuch rang pyaar ke aise bhi, iss pyaar ko kya naam doon
रोमांस को बड़े संकुचित अर्थ में लिया जाता है। छोटी सोच वालों के लिए यह मात्र लड़के-लड़की के बीच सेक्स-संबंध है। पर जब आप इसे व्यापक अर्थ में लेते हैं तो इसका अर्थ हो जाता है आनंद प्राप्त करना। जिस चीज से आनंद मिलता है, वह रोमांस है। इस रोमांस में प्रेम और सेक्स तो आता ही है, अन्य और कई बातें भी आ जाती हैं। देव आनंद साहब की आत्मकथा का नाम ही है 'रोमांसिंग विथ लाइफ'। यानी जीवन के साथ रोमांस। उनके लिए उनका काम रोमांस जैसा था। अपने काम से आनंदित महसूस करना रोमांस है। 

हमें बहती नदी, पक्षियों के कलरव, हवा की सनसनाहट से लेकर किताब पढ़ने, लेखन आदि किसी बात से आनंद मिलता है तो वह रोमांस है। मनोचिकित्सक फ्रायड भी यही कहता था। वह सेक्स को व्यापक अर्थ में लेता था और उसे लिबिडो कहता था। सेक्स एक जीवनीशक्ति है जिससे दुनिया का हर काम संपन्न होता है। विडंबना है कि सभी सेक्स में लिपटे पड़े हैं, कोई इससे मुक्त नहीं है, पर सभी इसे हेय दृष्टि से देख और 'मैं तो ऐसा नहीं हूं' कहकर अपने को चरित्रवान साबित करने की कोशिश करते हैं। समाज उसे ही चरित्रवान समझता भी है जो इससे दूर रहता है।

बाबाओं की इसलिए चल पड़ती है कि लोगों के मन में उनकी एक स्वच्छ छवि बनी रहती है। लेकिन जब वह बाबा आसाराम निकल जाता है तो लोग उसी बाबा से नफरत भी करने लग जाते हैं, जिनके आशीर्वाद लेने के लिए वे उनके चरणों में झुक जाते थे। पर क्या कोई इंसान सेक्स से परे है? पशु-पक्षी और वनस्पतियों तक में यह लिबिडो स्वाभाविक रूप से पाया जाता है। फिर दूसरों को हम कैसे तुरंत चरित्रहीन कह देते हैं और खुद को बड़े पाक-साफ? यहां पर स्पष्ट कर दूं कि मैं जबरदस्ती किये गये सेक्स की बात नहीं कर रहा हूं। वह वहशीपन और निंदनीय है। 

मैं सिर्फ इतना कहना चाह रहा हूं कि सेक्स को लेकर जो डबल स्टैंडर्ड है, उसे खुद से दूर करें। प्रेम एक शुद्ध भावना है और यह कभी नियमों में नहीं बंध सकता। यही रोमांस है जिसे व्यापक अर्थ में देखा जाना चाहिए।

Tuesday, June 12, 2018

अब दिन 24 घंटे नहीं बल्कि 25 घंटे के होंगे, जानिए क्यों?

earth will have 25 hours in a day, अब दिन 24 घंटे नहीं बल्कि 25 घंटे के होंगे

आजकल लोगों की जिंदगी में भागदौड़ इतनी बढ़ गयी है कि कई बार लोगों को दिन के 24 घंटे भी कम लगते हैं और कभी कभी दिन इतना बड़ा लगता है की दिन काटना मुश्किल हो जाता है, कई बार काम के लिए पूरा दिन भी कम पड़ जाता है। हमें अपने काम को अगले दिन के लिए छोड़ना पड़ता है ऐसे में अक्सर लोगों को यह कहते सुना जाता हैं, कि काश दिन में कुछ घंटे और बढ़ जाते। तो आपको बता दें की आपकी यह ख्वाहिश भी जल्द ही पूरी होने वाली है। आने वाले सालों में अब दिन 24 घंटे नहीं बल्कि 25 घंटे के होंगे। जी हाँ हैरान मत होइए यह बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि शोधकर्ताओं ने अध्ययन के बाद कहा है। इसके पीछे चंद्रमा की धीमी गति जिम्मेदार है जिसकी वजह से दिन लंबा होता जा रहा है।

दरअसल चंद्रमा और धरती के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है। एक अध्ययन ये भी बताता है कि करीब 1.4 अरब साल पहले चंद्रमा धरती के नजदीक था जिसकी वजह से दिन सिर्फ 18 घंटे का हुआ करता था। अध्ययन के अनुसार अरबों सालों से चंद्रमा और धरती के बीच की दूरी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है इस दूरी बढ़ने की वजह से धरती पर दिन लंबे होते जा रहे हैं। शोधकर्ताओं की मानें तो जिस तरह वर्तमान में एक दिन में 24 घंटे होते हैं तो इसी प्रकार बढ़ रही चन्द्रमा की दूरी की वजह से आने वाले वर्षों में दिन 25 घंटे के हो जायेंगे।

प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में छपी रिपोर्ट के मुताबिक 1.4 अरब सा्ल पहले चंद्रमा हमारे नजदीक था, लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता चन्द्रमा द्वारा पृथ्वी के चारों ओर अपनी धूरी पर घूमने के तरीके में बदलाव हुआ और धीरे-धीरे चन्द्रमा हमसे दूर हो रहा है। जिसकी वजह से आने वाले वर्षों में आपको दिन बड़े होते दिखाई देंगे यानि अब दिन 24 घंटे नहीं बल्कि 25 घंटे के होंगे।

Sunday, June 10, 2018

क्या आप जानते हैं भारत की इन जगहों के बारे में, जहां भारतीयों का ही जाना मना है


ये बात तो हर कोई जनता है कि आजाद भारत में हम कहीं भी आ जा सकते हैं और यह हमारा मौलिक अधिकार भी है। लेकिन आज हम भारत में मौजूद कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताने जा रहे जिसे जानकार आप हैरान हो जायेंगे, क्युकी ये जगहें भारत में भले ही हैं लेकिन भारतीयों का वहां जाना बिलकुल मना है।

Kasol_Israel_in_Himachal_Pradesh

कसोल
कसोल हिमाचल प्रदेश का एक छोटा सा गांव है। कम ही लोग इस बात को जानते होंगे कि यहां स्थित एक रेस्टोरेंट ऐसा है जहां भारतीयों के घुसने पर मनाही है। इस होटल के बारे में तब पता चला जब भारतीय महिला को अंदर आने से रोका गया और इस होटल के मालिक ने बताया के ये होटल सिर्फ इजरायली लोगो के लिए है। इस गांव को लोग मिनी इजरायल के नाम से भी जानते हैं क्योंकि यहां बड़ी तादाद में इजरायली आते है। 

Uno-In Hotel, (बंगलौर)
यह होटल सिर्फ जापानियों के लिए था। यहां भारतीयों का आना बिलकुल मना था। Uno-In Hotel बंगलौर में साल 2012 में शुरू किया गया था मगर साल 2014 में बंगलूरु सरकार ने इसे बंद कर दिया। 


puducherry beach

Puducherry के कुछ बीच
Puducherry भी एक टूरिस्ट स्पॉट माना जाता है। जहाँ कुछ-कुछ स्पॉट पे आपको केवल फॉरेनर्स ही दिखाई देंगे। इसके बारे में भी कहा जाता है की यहाँ भारतीयों के लिए नो एंट्री है। हालाँकि यह आधिकारिक तौर पर नहीं है। 


goa beach

Goa के कुछ बीच 
गोवा में भी कई बीचों पर भारतीयों का जाना मना है। यहां भी सिर्फ फॉरेनर्स की ही एंट्री है। फॉरेनर्स यहां आज़ादी से घूमते हैं। 

चेन्नई का एक होटल
ख़बरों के मुताबिक चेन्नई में स्थित एक होटल ऐसा है जहाँ सिर्फ विदेशियों की ही एंट्री है। कुछ लोग इसकी पहचान ‘हाईलैंड होटल’ के रूप में करते हैं, तो कुछ लोग पूर्व नवाब के घर ‘ब्रोडलैंड लॉज’ के तौर पर।

Saturday, June 9, 2018

सऊदी अरब में काम करने वालों के लिए मुश्किलें, वापस आ रहे हैं भारतीय

सऊदी अरब में काम करने वालों के लिए मुश्किलें, वापस आ रहे हैं भारतीय

सऊदी अरब में किये गए मजदूरों की पॉलिसी में बदलाव ने वहां काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पिछले कुछ महीनो से सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय अपने परिवार के सदस्यों को अपने देश भारत वापस भेज रहे हैं। वजह है सऊदी सरकार द्वारा पिछले कुछ समय में नियमों में काफी सख्ती। दरअसल लेबर मिनिस्ट्री ने सऊदी अरब के नागरिकों के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ने के लिए लेबर लॉ में कई बदलाव किये हैं। 

सऊदी अरब में काम करने वालों के लिए मुश्किलें, वापस आ रहे हैं भारतीय

बता दें कि कच्चे तेल के दामों में गिरावट की वजह से सऊदी अरब की इकोनॉमी काफी मुश्किल दौर में है। इसलिए सऊदी सरकार अब दूसरे स्रोतों से घाटे की भरपाई कर रही है। इसी में से एक है दूसरे देशों से आकर रह रहे लोगों पर टैक्स लगाना।



हालाँकि टैक्स लगाना कोई नयी बात नहीं है सऊदी सरकार प्रवासियों से पहले भी टैक्स लेती थी लेकिन पहले टैक्स इतना ज्यादा नहीं था। दरअसल सऊदी के अधिकारियों का मानना है कि विदेशी मजदूरों को निकाल देने से नागरिकों के लिए नई नौकरियां पैदा होंगी।  इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड के मुताबिक अभी तक सऊदी अरब में बेरोजगारी दर 12.1 फीसदी है।

सऊदी अरब में मॉडल की जगह ड्रोन ने किया रैंपवॉक

ramp-walk-by-drone-instead-of-model-in-saudi-arabia, सऊदी अरब में मॉडल की जगह ड्रोन ने किया रैंपवॉक

जैसा की आप जानते ही होंगे कि सऊदी अरब में आज भी महिलाओं पर कई तरह की पाबंदियां हैं। लेकिन अब धीरे-धीरे चीजें बदल रही हैं हालाँकि अभी भी यहां महिलाओं के फैशन शो में रैंपवॉक करने पर मनाही है। ऐसे में सऊदी अरब के डिजाइनर और आयोजकों ने रैंपवॉक करने के लिए एक अनोखा तरीका चुना और फैशन शो में मॉडल के बजाय एक ड्रोन से रैंपवॉक करवाया गया। हवा में उड़ने वाले ड्रोन की मदद से कपड़े प्रदर्श‍ित किए गए। हवा में उड़कर रैंप के एक हिस्‍से से दूसरे हिस्‍से तक महिलाओं के कपड़े और बैग जैसे एसेसरिज के साथ ड्रोन के जरिये 'कैटवॉक' कराया गया। मह‍िलाओं ने इस फैशन शो में बैकस्‍टेज का काम संभाला।

बता दें कि इस अनोखे तरीके को सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया जा रहा है। साथ ही इसकी वजह से इस फैशन शो को भूतिया फैशन शो करार दे दिया गया है। दरअसल, रैंप पर ड्रोन को एक-एक करके कई ड्रेसेज में दिखाया गया जिससे तस्वीरों को पहली नज़र में देखने पर कुछ ऐसा लग रहा था जैसे कपड़े हवा में उड़ रहे हों। खैर सोशल मीडिया पर तो इसे घोस्ट शो यानि भूतिया शो तक करार दे दिया गया और यही नहीं किसी ने यह भी लिखा कि लगता है कि सऊदी अरब में मह‍िलाओं से ज्‍यादा ड्रोन को अध‍िकार मिले हैं।

बता दें की सऊदी अरब में मह‍िलाएं फैशन शो नहीं कर सकती है, शायद इसलिए रैंपवॉक के लिए सऊदी अरब के फैशन डिजाइनरों ने यह अनोखा आईडिया निकला और इस का के लिए ड्रोन को चुना और हवा में उड़ने वाले इन ड्रोन की मदद से आसानी के साथ कपड़े प्रदर्श‍ित किए गए।

खैर आईडिया अनोखा भले ही हो लेकिन सोशल मीडिया पर हो रहे ट्रोल से साफ पता चलता है कि लोगों को उनका ये आइडिया बिलकुल भी पसंद नहीं आया और इससे यह भी साफ़ होता है कि टेक्नोलॉजी इंसान से जीत नहीं सकती।

Monday, June 4, 2018

बंद हो सकते हैं ये चार बैंक! मोदी सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

बंद हो सकते हैं ये चार बैंक! मोदी सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

सरकार बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रही है। जिसके तहत आईडीबीआई, ओबीसी, सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा को मिलाकर एक बड़ा बैंक बनाया जा सकता है। ऐसा होने पर यह बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बाद दूसरा बड़ा बैंक बन जाएगा। बता दें कि देश का बैंकिंग सेक्टर लगातार घाटे में चल रहा है। बैंकों के घाटे की वजह से सरकार पर लगातार वित्तीय दवाब बढ़ता जा रहा है। ऐसे में बैंकिंग सेक्टर में सुधार लाने के लिए सरकार ने 4 बैंकों को मर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है। 

इन चारों बैंकों के मर्जर के बाद तैयार होने वाले नए बैंक की कुल संपत्ति लगभग 16.58 लाख करोड़ रुपये हो सकती है। मर्जर के बाद नया बैंक अपनी संपत्ति आसानी से बेच सकेगा और घाटे की भरपाई की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। गौरतलब है कि इन बैंकों का विलय सरकार के लिए इसलिए भी जरूरी हो गया है क्योंकि 2018 में इन चारों बैंकों का कुल घाटा लगभग 22 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। 

इस मेगा मर्जर से होने वाले फायदों पर नज़र डालें तो कमजोर बैंकों को अपनी एसेट बेचने में मदद मिलेगी, खस्ताहाल सरकारी बैंकों की हालत में सुधार होगा व कर्मचारियों की छंटनी करना भी आसान होगी इसके अलावा घाटे वाली ब्रांचों को आसानी से बंद किया जा सकता है और साथ ही बैंकों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च भी कम किया जाएगा।

Saturday, June 2, 2018

स्कूल बस का रंग आखिर ‘पीला’ ही क्यों होता है?

स्कूल बस का रंग आखिर ‘पीला’ ही क्यों होता है?

हमारे देश में वैसे तो कई तरह की चीजें हैं जिनके बारे में जानने का हर किसी का मन करता है। इसी में से एक सवाल ये है कि स्कूल की बसों का रंग हमेशा पीला ही क्यों होता है? बचपन से लेकर आज तक जब भी कोई स्कूल बस पर नज़र पड़ती है तो वो पीले रंग की ही होती है। 

चाहे शहर हो या गाँव, यहाँ तक कि विदेशों में भी स्कूल बसों का रंग पीला ही होता है। आखिर इस रंग का मतलब क्या होता है? ऐसा सवाल शायद आपके मन में भी आया हो और आपने भी इस बारे में जानने की कोशिश की हो, कई बार व्यक्ति कुछ चीजों के बारे में जानने का प्रयास तो करते हैं लेकिन कभी-कभी उन्हें सम्पूर्ण जानकारी नहीं मिल पाती है लेकिन आज हम आपको इसी विषय पर बताने जा रहे है ताकि आप भी जान सकें की स्कूल बस अक्सर पीले रंग की ही क्यों होती है। स्कूल की बसों का रंग हमेशा पीला होने की वजह ये है कि बाकी रंगों की तुलना में पीले रंग में 1.24 गुना ज्यादा आकर्षण होता है और अन्य किसी भी रंग की तुलना में ये आंखों को जल्दी दिखाई देता है और इस बात की पुष्टि 1930 में अमेरिका में सबसे पहले हुई। जी हाँ! और आपने यह भी देखा होगा कि सुरक्षा कारणों के लिए सड़क मार्गों पर लगाए गए ट्रैफिक लाइट और खास सांकेतिक बोर्डों को भी पीले रंग में रंगा जाता है। जैसा की हमने यह भी बताया कि पीला रंग अन्य रंगों की तुलना में आँखों को बहुत जल्दी दिखाई देता है इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों की बसों का रंग पीला रखा जाता है ताकि हादसों को कम किया जा सके।

Tuesday, May 29, 2018

क्या है Nipah Virus?

क्या है Nipah Virus?

चमगादड़! कोई नयी बात तो नहीं है, चमगादड़ से तो किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होती थी, तो फिर इस निपाह वायरस नामक बीमारी ने कहाँ से जन्म ले लिया, क्या सचमुच ये वायरस चमगादड़ के जरिये फ़ैल रहा है, ऐसा सवाल न जाने कितने लोगों के मन में चल रहा होगा और ऐसे सवाल का होना लाज़मी भी है क्यूंकि इस समय निपाह वाइरस को लेकर कहीं न कहीं लोगों के मन में डर उत्पन्न हो गया है। 1998 में मलेशिया के कैम्पंग सुंगई निपाह नाम की जगह से शुरू हुआ निपाह वायरस (Nipah Virus) 10 साल बाद भारत में फिर आ गया है।  बता दें कि 2001 और 2007 में यह वायरस पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में भी सामने आया था।  अब यह केरल शहर में फैल रहा है। निपाह वायरस जानवर और इंसान दोनों के लिए जानलेवा है। इसकी चपेट में आकर अभी तक 13 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और इससे लगभग 40 लोग प्रभावित हो चुके हैं।

क्या है Nipah Virus?

लोगों के मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाने वाला निपाह वायरस इतना खतरनाक है कि इसकी चपेट में आने वाला व्यक्ति ४८ घंटे के भीतर कोमा में चला जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार Nipah Virus जानवरों खासकर सूअर और चमगादड़ से इंसानों में फैलता है। इस वायरस की पहचान सबसे पहले 1998 में मलेशिया में हुई थी। चमगादड़ खासतौर से इसके वाहक होते हैं। संक्रमित चमगादड़ या संक्रमित अन्य पक्षियों के खाये हुए फल से यह बीमारी इंसानो में फैलती है। पहले से संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने से भी यह रोग फैलता है। 

Monday, May 28, 2018

आ गया बाबा रामदेव का पतंजलि सिम कार्ड

आ गया बाबा रामदेव का पतंजलि सिम कार्ड

रिलायंस जियो के धमाकेदार आगाज के बाद टेलीकॉम सेक्टर में एक और स्वदेशी कंपनी की एंट्री हो गई है रामदेव बाबा ने पतंजलि ब्रांड के तहत भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के साथ मिलकर एक सिम कार्ड (patanjali sim card) लॉन्च किया है। इसे 'स्वदेशी समृद्धि सिम कार्ड' नाम दिया गया है। इसे पतंजलि और भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने मिलकर लॉन्च किया है। बता दें कि पतंजलि के सिम में यूजर्स को 144 रुपये का रीचार्ज कराना होगा। इसमें ग्राहकों को 2GB डेटा के साथ अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा मिलेगी।

पतंजलि के प्रोडक्ट पर 10% का डिस्काउंट

जी हाँ सबसे खास बात यह है इस सिम के जरिए पतंजलि के प्रोडक्ट पर ग्राहकों को 10% का डिस्काउंट भी दिया जाएगा। इसके अलावा सिम का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को 2.5 लाख रुपए तक का मेडिकल इंश्योरेंस और 5 लाख रुपए तक का लाइफ इंश्योरेंस भी दिया जाएगा। इस मौके पर बाबा रामदेव ने कहा, 'बीएसएनएल एक स्वदेशी नेटवर्क है और पतंजलि और बीएसएनएल का लक्ष्य देश की सेवा करना है।

फिलहाल ये सिम कार्ड केवल पतंजलि के कर्मचारियों को ही उपलब्ध कराया जाएगा. बाद में इसका विस्तार कर सिम कार्ड सभी ग्राहकों के लिए पेश किया जाएगा.

Sunday, May 20, 2018

Married Life में problem की वजह कहीं आप खुद तो नहीं

क्या आपके विवाहित जीवन में कोई समस्या है? क्या आप पहले जैसा सबकुछ सामान्य बनाने के लिए उत्तर की तलाश में हैं। आप इन उत्तरों को अपने भीतर ढूंढिए, क्योंकि आप भी कहीं न कहीं married life में आने वाली problems के ज़िम्मेदार खुद हैं। शादीशुदा ज़िन्दगी में यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि आपके साथ होने वाले विवाद आपकी वजह से हो रहे हैं या नहीं। ज्यादार लोग अपनी गलतियां न लेते हुए सारा दोष अपने पार्टनर को ही देते हैं और यह आसान भी है, क्यूंकि कोई भी नहीं चाहता की वह खुद को गलत साबित करे। जबकि अगर छोटी छोटी बातों पर ध्यान दिया जाय और अपने अंदर झांककर अपनी गलतियों को देखा जाय तो बड़ी आसानी से इस तरह के झगडे को प्यार में बदला जा सकता है। क्या आप जानते हैं कि अपने पार्टनर के साथ हो रहे विवाद में आप b अपने साथी को दोष देना और हर बार उसे जिम्मेदार बनाना आसान है। जब चीजें मुश्किल होती हैं, तो साथी को दोष देना आसान होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप भी इन सभी में समान शेयरधारक हैं। कुछ ही बराबर के हिस्सेदार हैं। अगर आपके मन में इस तरह का सवाल उठ रहा है की कैसे? तो चलिए हम आपको बताते हैं।

1. क्या “ना” बोलना आपकी आदत में शुमार हो चुका है

क्या आपका पार्टनर जब भी आपसे कुछ कहता है तो आप हमेशा ना कहते हैं? क्या आपको हमेशा इसकी आदत हो गई है? हर बात पर ना कहना आपकी शादी को मुश्किल में डाल सकता है। हर वैवाहिक रिश्ता 'एक हाथ दे, दूसरे हाथ ले’ पर चलता है। अगर आप हर बात पर ना कहते हैं तो आज ही अपनी आदत बदल डालिए, क्योंकि आप इस जवाब से अपना वैवाहिक जीवन को खतरे में डाल रहे हैं। यदि आपका पार्टनर आपसे कुछ रहा है तो कम से कम विनम्रता से उसकी बात को ज़रूर सुनें। इस बात में कोई शक नहीं है कि हर बात पर ना कहने से आपके पार्टनर को लगता है कि आपको उनकी फिक्र नहीं है। ऐसी भावना का उत्पन्न होना आपके वैवाहिक जीवन के लिए खतरनाक है।

2. आप राज़ छुपाते हैं

आपके रिश्ते में पारदर्शिता नहीं है। यह दूसरी बड़ी समस्या है। इस वजह से भी कई बार रिश्तों को खराब होते देखा गया है। जब एक पार्टनर चीजें छुपाना शुरू करता है तो दूसरा असुरक्षित महसूस करने लगता है। यदि आप चीजें अपने तक ही रखते हैं तो समस्या यहीं से शुरू हो रही है। इसलिए छुपाने के बजाय उनके सामने एक खुली किताब बनें। इससे कई समस्याएँ हल होंगी और रिश्ता मज़बूत होगा। साथ आप दोनों के बीच विश्वास की डोर मज़बूत होगी।

3. आप कभी माफ़ी नहीं मांगते

आपने आखिरी बार माफ़ी कब मांगी थी? वैवाहिक रिश्ता खराब होने का एक कारण यह भी है कि आप अपनी गलती नहीं मानते। अपनी गलतियों को मानें और माफ़ी मांगकर कहें कि ऐसा दोबारा नहीं होगा। सफल वैवाहिक जीवन का मंत्र है कि आप गलती पर माफ़ी मांगे नहीं तो समझें कि शादीशुदा ज़िंदगी खतरे में है।

4. नाटकीयता का अभिनय करना

यदि आप अपने रिश्ते में कुछ नाटकीयता पैदा कर रहे हैं तो इसे छोड़ दें। नहीं तो आपका रिश्ता तहस-नहस हो सकता है और प्यार का जुनून खत्म हो जाएगा। रिश्तों में नाटकीयता ठीक नहीं है। इससे रिश्ते खराब होते हैं।

5. गुस्सा

यदि आप गुस्से में, आक्रामक और क्रोधित बने रहते हैं तो इसे छोड़ दें। इससे आपके रिश्ते का मीठापन खतरे में पड़ सकता है और आपका ये बंधन खराब हो सकता है। सकारात्मक क्रोध भी बेकार है। ये चीजें आपके रिश्ते को जलाकर खाक कर सकती है। इन्हें हर कीमत पर त्याग दें। जब निर्णय लें और तर्क करें तो शांत रहें। बातचीत से समाधान निकलता है, गुस्से से कुछ भी हासिल नहीं होता। अपने गुस्से को काबू में रखें नहीं तो रिश्ता और ज़िंदगी दोनों खराब हो जाएंगे। विवाह के समंदर में गुस्सा एक खतरनाक शार्क के समान है।

इसलिए ऊपर की बातें ध्यान रखें और किसी भी कीमत में ये सब ना करें। इन्हें हर कीमत पर नज़रअंदाज़ करने का प्रयास करें। अगर आपको आर्टिकल अच्छा लगा, तो कमेन्ट सेक्शन में अपना फीडबैक लिखें और साथ ही बताएं कि क्या आपकी शादीशुदा ज़िंदगी में कोई समस्या है। हम अपने आर्टिकल के ज़रिये आपका जवाब देने की कोशिश करेंगे।

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