Viral Fact Now

Sunday, June 10, 2018

क्या आप जानते हैं भारत की इन जगहों के बारे में, जहां भारतीयों का ही जाना मना है


ये बात तो हर कोई जनता है कि आजाद भारत में हम कहीं भी आ जा सकते हैं और यह हमारा मौलिक अधिकार भी है। लेकिन आज हम भारत में मौजूद कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताने जा रहे जिसे जानकार आप हैरान हो जायेंगे, क्युकी ये जगहें भारत में भले ही हैं लेकिन भारतीयों का वहां जाना बिलकुल मना है।

Kasol_Israel_in_Himachal_Pradesh

कसोल
कसोल हिमाचल प्रदेश का एक छोटा सा गांव है। कम ही लोग इस बात को जानते होंगे कि यहां स्थित एक रेस्टोरेंट ऐसा है जहां भारतीयों के घुसने पर मनाही है। इस होटल के बारे में तब पता चला जब भारतीय महिला को अंदर आने से रोका गया और इस होटल के मालिक ने बताया के ये होटल सिर्फ इजरायली लोगो के लिए है। इस गांव को लोग मिनी इजरायल के नाम से भी जानते हैं क्योंकि यहां बड़ी तादाद में इजरायली आते है। 

Uno-In Hotel, (बंगलौर)
यह होटल सिर्फ जापानियों के लिए था। यहां भारतीयों का आना बिलकुल मना था। Uno-In Hotel बंगलौर में साल 2012 में शुरू किया गया था मगर साल 2014 में बंगलूरु सरकार ने इसे बंद कर दिया। 


puducherry beach

Puducherry के कुछ बीच
Puducherry भी एक टूरिस्ट स्पॉट माना जाता है। जहाँ कुछ-कुछ स्पॉट पे आपको केवल फॉरेनर्स ही दिखाई देंगे। इसके बारे में भी कहा जाता है की यहाँ भारतीयों के लिए नो एंट्री है। हालाँकि यह आधिकारिक तौर पर नहीं है। 


goa beach

Goa के कुछ बीच 
गोवा में भी कई बीचों पर भारतीयों का जाना मना है। यहां भी सिर्फ फॉरेनर्स की ही एंट्री है। फॉरेनर्स यहां आज़ादी से घूमते हैं। 

चेन्नई का एक होटल
ख़बरों के मुताबिक चेन्नई में स्थित एक होटल ऐसा है जहाँ सिर्फ विदेशियों की ही एंट्री है। कुछ लोग इसकी पहचान ‘हाईलैंड होटल’ के रूप में करते हैं, तो कुछ लोग पूर्व नवाब के घर ‘ब्रोडलैंड लॉज’ के तौर पर।

Saturday, June 9, 2018

सऊदी अरब में मॉडल की जगह ड्रोन ने किया रैंपवॉक

ramp-walk-by-drone-instead-of-model-in-saudi-arabia, सऊदी अरब में मॉडल की जगह ड्रोन ने किया रैंपवॉक

जैसा की आप जानते ही होंगे कि सऊदी अरब में आज भी महिलाओं पर कई तरह की पाबंदियां हैं। लेकिन अब धीरे-धीरे चीजें बदल रही हैं हालाँकि अभी भी यहां महिलाओं के फैशन शो में रैंपवॉक करने पर मनाही है। ऐसे में सऊदी अरब के डिजाइनर और आयोजकों ने रैंपवॉक करने के लिए एक अनोखा तरीका चुना और फैशन शो में मॉडल के बजाय एक ड्रोन से रैंपवॉक करवाया गया। हवा में उड़ने वाले ड्रोन की मदद से कपड़े प्रदर्श‍ित किए गए। हवा में उड़कर रैंप के एक हिस्‍से से दूसरे हिस्‍से तक महिलाओं के कपड़े और बैग जैसे एसेसरिज के साथ ड्रोन के जरिये 'कैटवॉक' कराया गया। मह‍िलाओं ने इस फैशन शो में बैकस्‍टेज का काम संभाला।

बता दें कि इस अनोखे तरीके को सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया जा रहा है। साथ ही इसकी वजह से इस फैशन शो को भूतिया फैशन शो करार दे दिया गया है। दरअसल, रैंप पर ड्रोन को एक-एक करके कई ड्रेसेज में दिखाया गया जिससे तस्वीरों को पहली नज़र में देखने पर कुछ ऐसा लग रहा था जैसे कपड़े हवा में उड़ रहे हों। खैर सोशल मीडिया पर तो इसे घोस्ट शो यानि भूतिया शो तक करार दे दिया गया और यही नहीं किसी ने यह भी लिखा कि लगता है कि सऊदी अरब में मह‍िलाओं से ज्‍यादा ड्रोन को अध‍िकार मिले हैं।

बता दें की सऊदी अरब में मह‍िलाएं फैशन शो नहीं कर सकती है, शायद इसलिए रैंपवॉक के लिए सऊदी अरब के फैशन डिजाइनरों ने यह अनोखा आईडिया निकला और इस का के लिए ड्रोन को चुना और हवा में उड़ने वाले इन ड्रोन की मदद से आसानी के साथ कपड़े प्रदर्श‍ित किए गए।

खैर आईडिया अनोखा भले ही हो लेकिन सोशल मीडिया पर हो रहे ट्रोल से साफ पता चलता है कि लोगों को उनका ये आइडिया बिलकुल भी पसंद नहीं आया और इससे यह भी साफ़ होता है कि टेक्नोलॉजी इंसान से जीत नहीं सकती।

Saturday, June 2, 2018

स्कूल बस का रंग आखिर ‘पीला’ ही क्यों होता है?

स्कूल बस का रंग आखिर ‘पीला’ ही क्यों होता है?

हमारे देश में वैसे तो कई तरह की चीजें हैं जिनके बारे में जानने का हर किसी का मन करता है। इसी में से एक सवाल ये है कि स्कूल की बसों का रंग हमेशा पीला ही क्यों होता है? बचपन से लेकर आज तक जब भी कोई स्कूल बस पर नज़र पड़ती है तो वो पीले रंग की ही होती है। 

चाहे शहर हो या गाँव, यहाँ तक कि विदेशों में भी स्कूल बसों का रंग पीला ही होता है। आखिर इस रंग का मतलब क्या होता है? ऐसा सवाल शायद आपके मन में भी आया हो और आपने भी इस बारे में जानने की कोशिश की हो, कई बार व्यक्ति कुछ चीजों के बारे में जानने का प्रयास तो करते हैं लेकिन कभी-कभी उन्हें सम्पूर्ण जानकारी नहीं मिल पाती है लेकिन आज हम आपको इसी विषय पर बताने जा रहे है ताकि आप भी जान सकें की स्कूल बस अक्सर पीले रंग की ही क्यों होती है। स्कूल की बसों का रंग हमेशा पीला होने की वजह ये है कि बाकी रंगों की तुलना में पीले रंग में 1.24 गुना ज्यादा आकर्षण होता है और अन्य किसी भी रंग की तुलना में ये आंखों को जल्दी दिखाई देता है और इस बात की पुष्टि 1930 में अमेरिका में सबसे पहले हुई। जी हाँ! और आपने यह भी देखा होगा कि सुरक्षा कारणों के लिए सड़क मार्गों पर लगाए गए ट्रैफिक लाइट और खास सांकेतिक बोर्डों को भी पीले रंग में रंगा जाता है। जैसा की हमने यह भी बताया कि पीला रंग अन्य रंगों की तुलना में आँखों को बहुत जल्दी दिखाई देता है इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों की बसों का रंग पीला रखा जाता है ताकि हादसों को कम किया जा सके।

यहाँ Whatsapp, Facebook यूज़ करने वालों को देने होंगे टैक्स

यहाँ Whatsapp, Facebook यूज़ करने वालों को देने होंगे टैक्स

सोशल मीडिया आजकल अपनी बातों को दुनिया के सामने रखने का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म हो गया है। जरा सोचिए कि अगर सरकार सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर टैक्स लेने लगे तो कैसा रहेगा? जी हां, हुआ भी ऐसा ही है। युगांडा में वॉट्सऐप (whatsapp) और फेसबुक (facebook) का इस्तेमाल करने वालों को अब टैक्स देना होगा। राष्ट्रपति योवेर मुसेवनी ने हाल ही में इससे संबंधित कानून को मंजूरी दे दी है। इसके तहत यूजर्स को रोजाना 200 शिलिंग (करीब 3.36 रुपए) देने होंगे। 

अब वहां के नागरिकों को फेसबुक (facebook ), व्हाट्सऐप (whatsapp), वाइबर (viber) और ट्विटर (twitter) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल के लिए हर रोज 3 रुपये 36 पैसे देने होंगे। सोशल मीडिया कानून में बदलाव के लिए पहल करने वाले देश के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी ने इस कानून का समर्थन करते हुए कहा कि यह कानून इसलिए लागू किया जा रहा है ताकि सोशल मीडिया पर फालतू की बातचीत और अफवाहों (गॉसिप) को रोका जा सके। यह कानून 1 जुलाई से लागू हो जाएगा लेकिन इसे किस तरह से लागू किया जाएगा, इस बात को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 

सोशल मीडिया कानून में बदलाव के लिए पहल करने वाले देश के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी ने मार्च में कहा था कि सोशल मीडिया फालतू की बातचीत और अफवाहों (गॉसिप) को बढ़ावा देता है। मुसेवेनी ने कहा कि सोशल मीडिया से प्राप्त कर से देश में गपशप और अफवाहों (गॉसिपिंग) के दुष्प्रभावों से निपटने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही इससे देश के बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज को चुकाने में भी मदद मिलेगी।

Tuesday, May 29, 2018

कार से उड़ान भरने की तैयारी, ट्रैफिक जाम से मिलेगा छुटकारा

कार से उड़ान भरने की तैयारी, ट्रैफिक जाम से मिलेगा छुटकारा

शहरों में आये दिन सड़कों पर जाम लगना कोई नयी बात नहीं है।  सोचिये जब आप भी किसी जाम में फंसे हों और लाख तरकीबें अपनाने के बाद भी आपको कहीं से रास्ता न मिले और जाम में खड़े होकर जाम खत्म होने का इंतज़ार कर रहे हों या अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए धीमी रफ़्तार से चल रहे हों तो आपके मन में कैसे कैसे सवाल उठेंगे। काश की मैं उड़ने वाली कार में होता! तो आसानी से इस जाम से निकल जाता। यही नहीं ट्रैफिक जाम की वजह से जिस स्थान पर दस मिनट में पहुंचना चाहिए, वहां लोग दो-दो घंटे में पहुंच रहे हैं। सड़कों पर गाड़ियों का भारी दबाव है। यातायात व्यवस्था चरमरा सी गई है। इसे देखते हुए आइआइटी कानपुर के विशेषज्ञ उड़ने वाली कार के निर्माण में लग गए हैं। यह कार सीधे 'टेक ऑफ' और 'लैंडिंग' कर सकेगी। इसके लिए रनवे की जरूरत नहीं पड़ेगी।संस्थान ने कार के निर्माण के लिए विटॉल एविएशन कंपनी से 15 करोड़ का करार किया है। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग अगले पांच साल के अंदर 800 से 1000 किलोग्राम का प्रोटोटाइप मॉडल तैयार करेगा। सफल परीक्षण के बाद कार को मुंबई में तैयार किया जाएगा, जहां इसकी फैक्ट्री लगाने की योजना है। मॉडल को मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत तैयार किया जाएगा।

एयरोस्पेस विभाग हवा में उड़ने वाली टू सीटर कार बना रहा है। यह अधिकतम 12 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकेगी। न्यूनतम ऊंचाई 1000 फीट रहेगी। कार इलेक्ट्रिक पावर और कंबशन तकनीक पर काम करेगी। इसकी गति 90 से 100 मीटर प्रति सेकंड होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, हवा में उड़ने वाली कार में सुरक्षा की खास व्यवस्था होगी। कई तरह के सेंसर लगे रहेंगे। किसी तरह की आपदा होने पर किस तरह से पैराशूट का इस्तेमाल किया जाए, उस पर मंथन चल रहा है। इंजन में कम से कम आवाज हो, एयर ट्रैफिक को नुकसान न पहुंचे, इस पर भी काम चल रहा है।

सेना के रेस्क्यू ऑपरेशन में काम लाया जा सकता है

एयर टैक्सी को सेना के रेस्क्यू ऑपरेशन में काम लाया जा सकता है। अमूमन एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर के इंजन से काफी आवाज आती है, जिसकी वजह से दुश्मनों को उसके आने की जानकारी मिल जाती है। पहाड़ी और बर्फ वाले क्षेत्रों में भी इसे उड़ाना आसान होगा।

Thursday, May 24, 2018

स्टेडियम : इतना खूबसूरत कि यहां मैच नहीं स्टेडियम देखने आते हैं लोग



हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों के बीच बना धर्मशाला का ये स्टेडियम बेहद खूबसूरत है। इस स्टेडियम में आप मैच के साथ प्रकृति के सुंदर नजारे का आनंद उठा सकते हैं।

सिर्फ भारतीय ही नही बल्कि विदेशी खिलाड़ी भी इस स्टेडियम की खूबसूरती के दीवाने हैं। पहाड़ों के जादुई दृश्य से घिरे इस स्टेडियम की फोटो ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ने सोशल मीडिया पर शेयर की थी और उसकी काफी तारीफ भी की थी।

समुद्रतल से 1457 मीटर की ऊँचाई पर स्थित धर्मशाला के इस स्टेडियम में 23 हजार दर्शकों केबैठने की व्यवस्था है


इस स्टेडियम में पहला वनडे मैच जनवरी 2013 में खेला गया था जबकिपहला टी-20 मैच अक्टूबर 2015 में खेला गया था।

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